एक युवती जब माँ बनती है,
ममता के धागों से बच्चे का भविष्य बुनती है,
ज़ज्बात रंग -बिरंगे उसके,
बच्चे के रंग में ढलते हैं,
दिल के तारों से हो झंकृत,
लोरी की हीं गूंज निकलती,
माँ अल्फाज़ में जैसे हो,
दुनियां उसकी सिमटती चलती ,
फिर क्या, नयनों में झिलमील सपने,
आँचल में अमृत ले चलती ,
पग -पग कांटे चुनती रहती,
राहों की सारी बाधाएं,
दुआओं से हरती चलती,
हो ममता के वशीभूत बहुत,
वो जननी बन जीवन जनती है,
एक युवती जब माँ बनती है,
ममता के धागों से बच्चे का भविष्य बुनती है।।
ममता
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Comments
10 responses to “ममता”
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beautiful poem.
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लाजवाब
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really nice, heart touching poem
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bahut hi badiya kavita, full of emotions, mom is all above always.
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no words, just superb, nice peom mam
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thanks dear
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thanks a lot Mithilesh ji
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वाह
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वाह
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बहुत खूब
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