जिन्हें हम प्यार करते हैं
नहीं इजहार करते हैं
देखते हैं उन्हें छुपकर
पर सामने जाने से डरते हैं
एक दिन पूँछ बैठे हम
किसी से प्यार है तुमको
वो बोले हाँ हम किसी
से किसी से प्यार करते हैं
आज तो उगलवा ही लेंगे हम
ये सोंच लिया हमने
पूँछा कौन है वो लड़की
क्या नाम है उसका ?
वो बोले:
जिसे हम प्यार करते हैं
नहीं बदनाम करते हैं
हमने बड़ी शिद्दत से
फिर पूँछा
कहाँ रहती है वो लड़की
और दिखने में है कैसी ?
वो बोले जाने कैसी है !
मुझे तो अच्छी लगती है
गोरी-सी है पतली-सी
है थोड़ी नकचिढ़ी लड़की
रहती है सीतापुर में
और करती है बी.टी.सी.
मेरे दिल की है मलिका
रोज ख्वाबों में आती है
लिखा करती है कविताएं
मुझे जी-जान से चाहे
करता हूँ बात जब उससे
तो टेसू ही बहाती है
खुद को ही अपनी वो
सौतन समझती है
अपने आप को ही वो
सौ गाली बकती है
मुझे प्यार है किसी और से
वो इस गलतफहमी में
रहती है
मेरे प्यार का वो कहाँ
एहसास करती है
ना बोलूंगा कभी उसको
कि कितना प्यार है मुझको
देखता हूँ वो कब इस
बात को जान पाती है…
मलिका***
Comments
12 responses to “मलिका***”
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गजब, वाह वाह, क्या बात है
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धन्यवाद आपका
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किसी से दो बार हो गया
कृपया एक बार पढ़ें -
लाजवाब ,बहुत ही शानदार प्रस्तुति wow
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Thanks di
इस खास कविता को पसंद करने के लिए
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अतिसुंदर
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Thanks
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✍👌👌
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Thanks rishi
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सुन्दर
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Tq
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