महफ़िल में

महफ़िल में आइए ,
ज़रा दुपट्टा ओढ़ कर
हर शख़्स की नज़र,
आप पर ही है ..

*****✍️गीता

Comments

14 responses to “महफ़िल में”

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद आपका भाई जी 🙏

  1. कवि गीता जी द्वारा प्रस्तुत यह चार पंक्तियों की कविता अभिधा के साथ-साथ लक्ष्यार्थ प्रस्तुत करती प्रतीत होती है। जो कि किसी भी शास्त्रार्थ में पूरी तैयारी के साथ पेश होने की प्रेरणा भी दे रही है। अभिधा और लक्षणा दोनों से भरपूर सुन्दर रचना।

    1. Geeta kumari

      आपकी इतनी इतनी ज्यादा प्रेरक और शानदार समीक्षा के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी ।आज तो समीक्षाओं की वर्षा हो रही है हम पर । मात्र चार पंक्तियों की कविता के लिए इतनी सुन्दर समीक्षा । बहुत बहुत शुक्रिया सर 🙏

  2. बहुत खूब, अत्यंत उम्दा

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत शुक्रिया आपका पीयूष जी 🙏

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद आपका पीयूष जी 🙏

  3. Very nice गीता मैम

    1. Geeta kumari

      Thank you chandra ji for your precious compliment.

  4. नजाकत भरी रचना

    1. Geeta kumari

      Thanks for your lovely complement.

  5. अतिसुन्दर

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद आपका कमला जी🙏

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