कुछ देर की गर्मी थी,
फ़िर बादल घनघोर आ गया
तब तुम्हारा वक्त था ,
अब हमारा दौर आ गया ।।
बादल घनघोर
Comments
9 responses to “बादल घनघोर”
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अतिसुंदर
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समय बदलते रहता है, कभी किसी का वक्त होता है कभी किसी का। कभी बादल का दौर चलता है तो कभी सूरज की तपिश तो कभी ठंडी ठिठुरन।
चुनौती पेश करती बेहतरीन पंक्तियाँ।-
आपकी सटीक टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी
कविता के भाव को समझने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद सर
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बहुत उम्दा कविता, बहुत खूब
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Thank you very much Piyush ji 🙏
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बहुत ही लाजवाब जी
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Thank you very much Joshi ji 🙏
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Nice
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Thank you very much.
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