माँ

माँ ममता का सागर है,
प्रेम का छलकता गागर है।
माँ की महिमा को यूं जानें,
कि माँ हमें इस दुनियाँ से,
नौ माह पूर्व ही जाने।
हमें यह दुनियाँ दिखाने को,
प्रभु ने चुन लिया माँ को।
प्रभु का प्रतिनिधि है माँ,
माँ ही है प्रथम गुरु,
माँ से ही यह जीवन शुरू।।
_____✍️गीता

Comments

13 responses to “माँ”

  1. माँ ममता का सागर है,
    प्रेम का छलकता गागर है।
    माँ की महिमा को यूं जानें,
    कि माँ हमें इस दुनियाँ से,
    नौ माह पूर्व ही जाने।
    सुंदर पंक्तियां और मां पर भावाभिव्यक्ति

    1. Geeta kumari

      बहुत सुंदर समीक्षा है प्रज्ञा जी, बहुत-बहुत धन्यवाद

      1. आपका सदा ही आभार है

  2. Satish Pandey

    प्रभु का प्रतिनिधि है माँ,
    माँ ही है प्रथम गुरु,
    माँ से ही यह जीवन शुरू।।
    ———– कवि गीता जी की बहुत सुंदर पंक्तियां। माँ वास्तव में ईश्वर का प्रतिनिधि है । माँ ही जीवन में सब कुछ है। सुन्दर प्रस्तुति

    1. Geeta kumari

      कविता की इतनी सुन्दर और सटीक समीक्षा हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी।उत्साह वर्धन टिप्पणी के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद

  3. वाह बहुत सुंदर रचना

    1. Geeta kumari

      सराहना हेतु हार्दिक धन्यवाद कमला जी

    1. Geeta kumari

      हौसला अफजाई के लिए शुक्रिया चंद्रा जी

  4. बहुत खूब रचना

    1. बहुत-बहुत आभार सर

  5. बहुत सुंदर रचना

    1. Geeta kumari

      बहुत-बहुत आभार सर

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