10 Comments

  1. धूल और सब गर्द, पड़ी हो जो विकास में,
    पहले वो हो साफ, रिआया इसी आस में,
    **********राजा का धर्म समझाती हुई कवि सतीश जी की बहुत सुन्दर और सटीक रचना । छंद बद्ध शैली के विशेषज्ञ कवि सतीश की उत्कृष्ट रचना ,उम्दा लेखन

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