*मां की याद*

जब भी होती हूं उदास,
बहुत याद आती हो मां
याद आती हैं बचपन की बातें,
मेरे लिए जागती, तुम्हारी रातें
याद आता है….
तुम्हारा नई-नई बातें सिखाना,
कभी गुस्से से डांटकर,
वो चुपके से पुचकारना
बहुत याद आता है मां,
तुम्हारा स्नेह भरा हाथ
तुम्हारी वो मीठी बातें,
तुम्हारे कोमल स्पर्श का एहसास,
बहुत याद आता है मां..

*****✍️गीता

Comments

14 responses to “*मां की याद*”

  1. आपके भाव मेरे भावों से मिलते हैं
    बहुत सुंदर

    1. Geeta kumari

      इसके लिए आपका हार्दिक धन्यवाद प्रज्ञा । बहुत बहुत आभार

    1. Geeta kumari

      धन्यवाद आपका

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    1. Geeta kumari

      Thank you bhai

  3. बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति ।
    माँ जीवन की सबसे अमूल्य निधि

    1. Geeta kumari

      धन्यवाद सुमन जी

  4. वाह क्या बात है, माँ की याद पर बहुत ही सुंदर रचना। कथ्य व शिल्प दोनों ही दृष्टि से अतिउत्तम रचना

  5. Geeta kumari

    इतनी अच्छी समीक्षा के लिए बहुत बहुत धन्यवाद सतीश जी

  6. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    अतिसुंदर

    1. Geeta kumari

      सादर धन्यवाद भाई जी 🙏

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