दो माह पूर्व ही
विवाह हुआ था उसका
किसी की नाजों से पाली गई
बिटिया थी वह,
कितनी प्यारी गुड़िया थी वह।
अचानक पता चला
उसका निधन हो गया है।
न बीमार थी,
न कोई अन्य बात थी।
लेकिन गले में निशान मिला
लोग बोल रहे थे जिसके
साथ सात फेरे लिए थे
उसी ने सुला दिया,
कभी न जगने वाली नींद में।
आवाजें उठ रही हैं,
दहेज हत्या बन्द हो,
मासूम के कातिलों को
सजा मिले।
लेकिन वह तो चली गई,
जिसकी शादी के लिए
पिता ने खेत बेच दिया था,
सारी मांग तो पूरी कर ही दी थी।
फिर क्या रह गया था,
जो बिटिया मिटा दिया,
बेजान बना दिया।
मिटा दिया
Comments
8 responses to “मिटा दिया”
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बहुत ही मार्मिक घटना की अभिव्यक्ति
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धन्यवाद चंद्रा जी
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बहुत ही मार्मिक प्रस्तुति
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बहुत बहुत धन्यवाद
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बहुत ही सुन्दर रचना है।
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बहुत बहुत धन्यवाद
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दहेज हत्या बन्द हो,
मासूम के कातिलों को
सजा मिले।
लेकिन वह तो चली गई,
जिसकी शादी के लिए
पिता ने खेत बेच दिया था,
……. आंखों में आंसू लाती हुई बेहद मार्मिक रचना, सोचने पर मजबूर कर देती है, क्या ऐसे लोगों को इंसान कहना चाहिए-
इस बेहतरीन समीक्षा हेतु आपको बहुत बहुत धन्यवाद। सादर अभिवादन।
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