मिठास दूँगा

शब्द हूँ
भुने चने सा
सूखा सा,
आपकी रसना के रस
में मिलकर मिठास दूँगा।
कह डालो कि
मैं भी आपका हूँ
फिर मैं भी
अपनेपन का एहसास दूँगा।

Comments

15 responses to “मिठास दूँगा”

    1. बहुत बहुत धन्यवाद प्रज्ञा जी

  1. वाह सर अति उत्तम पंक्तियाँ, अति उत्तम विचार

    1. बहुत बहुत धन्यवाद जी

  2. Geeta kumari

    बहुत ही सुन्दर कविता और सुंदर अभिव्यक्ति..

    1. बहुत बहुत धन्यवाद, सादर अभिवादन गीता जी

  3. बहुत शानदार कविता waah

  4. Vasundra singh Avatar
    Vasundra singh

    भुने चने की उपमा अतुलनीय है

    1. बहुत बहुत धन्यवाद जी

  5. देवी Avatar

    बहुत सुंदर कविता,

    1. सादर धन्यवाद जी

    1. सादर धन्यवाद जी

  6. Seema Chaudhary

    सुन्दर पंक्तियां

Leave a Reply

New Report

Close