मीत मेरे
तेरी सूरत पर निर्भर रह कर
नहीं किया था प्यार तुझे
मैंने तेरी सीरत देखी
तभी किया था प्यार तुझे।
सूरत सदा नहीं रहती है
सीरत देती है अंतिम साथ,
तन आकर्षित संबंधों का
अधिक नहीं होता है साथ।
मन से जुड़े हुए रिश्ते ही
हर स्थिति में, होते हैं साथ,
इसीलिये मन जोड़ा तुझसे
अंतिम साँसों तक है साथ।
—— Dr. Satish Pandey
वाह क्या बात है, सूरत कुछ भी नहीं सीरत के सामने
सादर धन्यवाद
वाह वाह क्या बात है!!!!!!
सादर धन्यवाद जी
जीवन साथी के साथ संबंधों की बहुत सुंदर व्याख्या…. ख़ूबसूरत रचना
बहुत बहुत धन्यवाद जी
आपने बहुत अच्छा लिखा है
बहुत सारा धन्यवाद जी
वाह
thanks