हम कवियों की श्रेष्ठता का निर्णय
जबसे सॉफ्टवेयर करने लगा,
तब से हम इतने सुपरफास्ट हो गए,
कि
एक घंटे में बीस बीस कवितायें
लिखने लगे,
एक घंटा कहाँ हम लगातार
चार पांच घंटे के भीतर
सौ मौलिक कवितायें
लिखने में सफल हो गए,
और श्रेष्ठ हो गए,
सॉफ्टवेयर बेचारा क्या जाने
हम अपनी मौलिक लिख रहे हैं
या जोड़ तोड़ से,
लेकिन
सॉफ्टवेयर अचंभित तो ही रहा होगा
कि हम सुपरफास्ट हो गए
मुक्तक
Comments
7 responses to “मुक्तक”
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Achcha, main samajh Rahi hoon. Par fast hona achcha hai
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जमाने के अनुकूल खुद को बना ले वही तो इंसान है।
वरना जमाना भी नादान है।। -

अति का भला न बोलना
अति की भली न चुप
अति किसी भी चीज की ठीक नहीं
Good कविता-
Ye hunar har kisi me nhi hota, likhne ki ati achchi h.
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Awesome
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अतुलनीय
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ऐसा होना चाहिए क्योंकि जमाना 4G का है
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