10 Comments

  1. बहुत ख़ूब…
    रहिमन विपदा हो भली,जो थोड़े दिन होय,
    हित – अनहित या जगत में जानी परत सब कोय।
    ————– रहीम दास जी के दोहे को चरितार्थ करती बहुत सुंदर रचना।

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