मुस्कान आपकी

मुस्कान आपकी
खिले फूल जैसी,
भुलाने सक्षम है
गम हमारे।
वाणी में इतना
मीठा भरा है,
विरोधी भी हो
जाते हैं तुम्हारे।
चमकता हुआ बल्ब
बोलूँ न बोलूँ,
मगर इस अंधेरे में
हो तुम दुलारे।
निराशा के कुएं में
पड़ने लगे थे
मगर तुमने आकर
किये नौ सहारे।

Comments

8 responses to “मुस्कान आपकी”

  1. बहुत बढ़िया वाह

  2. बहुत सुंदर रचना

  3. अति उत्तम रचना

  4. Geeta kumari

    मुस्कान आपकी
    खिले फूल जैसी,
    भुलाने सक्षम है
    गम हमारे।
    ______कवि की कोमल भावनाओं की खूबसूरत प्रस्तुति, सुन्दर शिल्प और भाव लिए हुए बहुत सुंदर कविता

  5. बहुत ख़ूब, अति उत्तम

  6. vikash kumar

    JAY ram jee ki

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