दुनिया में हर तरीके के लोगों से
मिलने के बाद
दर-दर की ठोकरें खाने के बाद
सभी के प्यार को आजमाकर
गैरों से दिल पर चोट खाकर
समझ आ गया मुझको,
निरमोही है पर सच्चा है
‘मेरा खोंटा सिक्का’ ही
सबसे ही सबसे अच्छा है !!
मेरा खोंटा सिक्का…!!
Comments
6 responses to “मेरा खोंटा सिक्का…!!”
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बिल्कुल सच प्रज्ञा जी
देर से सही पर सबको समझ आता है
जो है पास उसी से सच्चा नाता है-

मुझे पता ही नहीं था कि इस पर आपकी टिप्पणी मिलेगी..
धन्यवाद मैं बहुत खुश हूँ
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बिल्कुल सत्य प्रज्ञा जी
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Thanks
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Very true lines pragya.
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Thanks
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