8 Comments

  1. सोचती रहती हूँ मैं यदा-कदा,
    मेरी ज़िन्दगी में आप न आते तो क्या होता…
    बहुत ही लाजवाब पंक्तियाँ, अति उत्तम सृजन गीता जी। ऐसे ही निरन्तर लिखते रहिये।

    1. इस अमूल्य समीक्षात्मक टिप्पणी के लिए और उत्साह वर्धन हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी, अभिनन्दन सर

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