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  1. वात्सल्य रस से परिपूर्ण बेहद स्नेहमयी कविता। सुमधुरता का संचार करने में बेहद सफल कविता।
    पापा की परी है वो,
    भैया की दुलारी
    बातूनी है सबसे ज्यादा
    घर भर की है प्यारी ..
    सरस्, सहज सुन्दर अभिव्यक्ति।

    1. कविता की सुंदर समीक्षा और सराहना हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी 🙏 बहुत बहुत आभार..

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