18 Comments

  1. कभी तकिये से आकर पूँछों
    हम उसे कितना भिगोते हैं!!
    सिसकियाँ सुन-सुनकर मेरे
    कमरे की दीवारों में दरारे
    आ गई हैं
    अत्यंत गहरी और मार्मिक संवेदना।
    बहुत खूब

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