मेरे अपने

हम गिरें भी तो वहीं
जहां इर्द-गिर्द मेरे अपने थे।
शायद ना थी खबर हमें
रेत पर बने मेरे सपने थे।
वीरेंद्र

Comments

3 responses to “मेरे अपने”

  1. बहुत खूब

  2. बहुत सुंदर पंक्तियां

Leave a Reply

New Report

Close