मेरे गुरु जी

कभी न भाये गुरु जी तुम,
वो मैथ की मिस्ट्री,वो बोरिंग केमिस्ट्री
वो छडी की मार वो डांट वो पुकार
खड़े कर देना बेंच पर
नज़रे रखने को कहना अपने लेंस पर
कितने ही बार ज़ीरो आए
गुरुजी तुम कभी ना भाए
। । । । । । । । । । । । । ।
ये तो बचपन की कहानी थी
आज हर बात आपको बतानी थी
वो लड़का जिसे आपने ही संवारा था
जो कभी बदतमीज और आवारा था
उसने एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पुरस्कार जीत लिया है
उस सम्मान को आपके हाथों से लेने को कह दिया है
। । । । । । । । । । । । । । । । । । । । । । । । । । ।
आज दुनिया त्याग और समर्पण की दीवानी होगी
जब स्टेज पर मेरे गुरु की आगवानी होगी।

Comments

6 responses to “मेरे गुरु जी”

  1. Kanchan Dwivedi

    धन्यवाद

  2. राम नरेशपुरवाला

    Wah

  3. Kanchan Dwivedi

    आभार आपका,

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