मेरे दामन को सरेआम
दागदार कहता है,
गंदी नाली का कीड़ा है तू
गंगाजल को अपवित्र
कहता है..!!
मेरे दामन को..!!
Comments
14 responses to “मेरे दामन को..!!”
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बहुत बढ़िया
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धन्यवाद
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जो नारी को बदनाम करें,
गंगाजल को अपवित्र कहे,
हम ऐसे को स्त्री से जन्मा ना कह के,
मुर्गी के अंडे की औलाद कहें|
😃😃😃😃😃😃😃-

😀😀😀
आपकी समीक्षा से
एक पल को हंसी आ गई
आपके हृदय में नारी के प्रति
सम्मान देख कर
हार्दिक खुशी हुई
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जो पुरुष नारी के दामन पर उंगली उठाए, वह पुरुष नहीं, कापुरूष है।
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🙏🙏
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धन्यवाद
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सुन्दर अभिव्यक्ति
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🙏🙏
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धन्यवाद
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सुंदर
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🙏
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🙏🙏
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