जिसके थोड़े से दर्द को देखकर
बेचैन हो उठता है यह मन
वही तो हो तुम,
मेरे प्रियतम।
जिसके थोड़े से आँसू देखकर
पसीना पसीना हो जाता है तन
वही तो हो तुम
मेरे प्रियतम।
जिसकी खुशी ही है
मेरे लिए सबसे बड़ा धन,
वही तो हो तुम
मेरे प्रियतम।
मेरे प्रियतम
Comments
19 responses to “मेरे प्रियतम”
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Very good poem
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Thanks ji
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सुंदर
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बहुत बहुत धन्यवाद
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वाह क्या बात है
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सादर आभार
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बहुत बढ़िया
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धन्यवाद जी
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सुन्दर अभिव्यक्ति!
अपनों का दर्द सच में मन को
बेधित कर जाता है ।-
सुन्दर, समीक्षा हेतु हार्दिक अभिवादन जी
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बहुत सुंदर
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धन्यवाद सर
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Very nice
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Thanks ji
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Very nice
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Thanks ji
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Very good
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Thank you ji
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बहुत बहुत आभार
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