मेहनत

अपनी अपनी मेहनत का,
खाए सब संसार
कह गए विद्वान लोग,
यही जीवन का सार
जैसे हांडी काठ की,
चढ़े ना दूजी बार।
चढ़े न दूजी बार,
एक बार ही चढ़ती है,
मेहनत ही है जो,
किस्मत से भी लड़ती है।।
_____✍️गीता

Comments

6 responses to “मेहनत”

  1. अपनी अपनी मेहनत का,
    खाए सब संसार
    कह गए विद्वान लोग,
    यही जीवन का सार।
    —— बहुत ही शानदार रचना। उच्चकोटि की प्रस्तुति। श्रेष्ठ रचना

    1. Geeta kumari

      इतनी सुन्दर, और उत्साह वर्धन करती हुई समीक्षा हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी

  2. वाह अति उत्तम कविता

    1. Geeta kumari

      बहुत-बहुत धन्यवाद पीयूष जी

  3. बहुत ही सही कहा है

    1. Geeta kumari

      धन्यवाद प्रज्ञा

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