‘बेवजह ही है मुझसे जुड़ी हर उम्मीद तेरी,
क्या तेरे दिलो-ज़ेहन में खयाल नही उठता..
मैं छोड़ आया हूँ अभी-अभी समंदर को,
तेरी झील का रुख करने का सवाल नही उठता..’
मैं छोड़ आया हूँ..
Comments
10 responses to “मैं छोड़ आया हूँ..”
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वाह वाह, आपने धूम मचा दी है, आनंद आ गया
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इतनी प्रेरक समीक्षा के लिए आपका आभार
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लाजवाब 👌👏👏
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🙏🙏
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✍👌👌👌✍👌👌🙏👍
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शुक्रिया जी
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Sunder
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Thank You
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बेहद शानदार
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शुक्रिया गीता जी
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