मैं बीता कल हूँ भले ही
तुम्हारे लिए ,
पर किस के लिए तो
आज हूँ मैं।
तुम्हारी नजर में
बेवफा हूँ।
पर किसी वफ़ा का नाज हूँ मैं।
स्वयं ठुकरा के
मेरी बाहों को,
तुम उछालो भले ही
कीच मुझ पर,
तब भी तुमसे नहीं
नाराज हूँ मैं।
उतार फेंका जिसे
वो गले का हार हूँ मैं,
तुम्हारा कुछ भी नहीं अब
किसी का ताज हूँ मैं।
मैं बीता कल हूँ भले ही
तुम्हारे लिए ,
पर किस के लिए तो
आज हूँ मैं।
मैं बीता कल हूँ भले ही
Comments
17 responses to “मैं बीता कल हूँ भले ही”
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बहुत ख़ूब
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धन्यवाद जी
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बहुत अच्छी पंक्तियाँ
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Thanks
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Very good
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Thanks
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बहुत खूब
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धन्यवाद जी
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टाइपिंग मिस्टेक हुई है, सुधार सेवा में प्रस्तुत है-
मैं बीता कल हूँ भले ही
तुम्हारे लिए ,
पर किसी के लिए तो
आज हूँ मैं। -

Good
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Thanks
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सुन्दर प्रस्तुति
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Thanks ji
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बहुत शानदार
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Thanks
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बहुत खूब
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Thanks
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