मैं शिक्षक हूं वर्तमान का!

मैं शिक्षक हूं वर्तमान का,
मुझे बच्चों से डर लगता है,
मजबूर-सा हूं पढ़ाने में,
बेरोजगारी से डर लगता है।

सम्मान-वम्मान जुति बराबर
मगर लाचारी से डर लगता है,
अध्यापन ही एक काम नहीं
अतिरिक्त कार्य बहुत से होते है,
मालिक बड़े ही प्रताड़ित करते,
सैलरी रुकने से डर लगता है।

क़तरा-क़तरा ख़ून निचोड़े
फिर जेब से पैसा निकलता है,
ना पढ़ाएं तो खानें के लाले,
भूखमारी से डर लगता है।

गुरु है , गोविंद समान ,
कहने को अच्छा लगता है।
मैं अध्यापक हूं निजी संस्थान का,
दुत्कारी से डर लगता है।

Comments

15 responses to “मैं शिक्षक हूं वर्तमान का!”

  1. वर्तमान में अध्यापक की स्थिति को दर्शाती सुंदर कविता

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      बहुत बहुत धन्यवाद

  2. अतिसुंदर भाव अतिसुंदर रचना

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      बहुत बहुत धन्यवाद सर

  3. Geeta kumari

    हृदय स्पर्शी चित्रण।

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar

      बहुत बहुत आभार गीता मैम
      आपकों भी शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं।

      1. Geeta kumari

        धन्यवाद आपका 🙏

  4. Satish Pandey

    गुरु है , गोविंद समान ,
    कहने को अच्छा लगता है।
    मैं अध्यापक हूं निजी संस्थान का,
    दुत्कारी से डर लगता है।
    सच को उजागर करती पंक्तियाँ, बहुत खूब।

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar

      बहुत बहुत धन्यवाद सतीश सर
      भावों को समझने के लिए

  5. मोहन जी, आप आजकल के नटखट विद्यार्थियों की शरारतों की वजह से अपना मन दुखी मत करिए।आज शिक्षक दिवस पर आप अपने शिक्षकों को,अपने गुरुओं को स्मरण कीजिए।आपका मन स्वतः ही प्रफुल्लित हो जाएगा।आपके पास टैलेंट है और शिक्षा कभी व्यर्थ नहीं जाती है।आप प्रतीक्षा कीजिए अच्छे फल भी अवश्य मिलेंगे।

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar

      गीता मैम यह मेरे व्यक्तिगत विचार के साथ -साथ ,हजारों की संख्या में निजी संस्थाओं में काम कर रहे उन प्राइवेट टीचरों की व्यथा है जिन का शोषण बच्चों के अभिभावक एवं विद्यालय की मैनेजमेंट पूरी ईमानदारी के साथ करते हैं हमारा समय कुछ और था बहुत आदर सम्मान करते थे हम अपने अध्यापकों का, मगर अब तो बिल्कुल हवा बदल गई है हमारे गुरु की डांट और फटकार का ही नतीजा है कि हम काबिल बन गए
      मगर आज के समय में एक बार डांट कर देखो
      विद्यालय के बाहर पकड़ लेते हैं टीचर को। मेरे यहां ये आम बात है। और शिक्षण संस्थाओं में मेनेजमेंट के द्वारा कितना शोषण होता है सबको पता ही है
      मैम सच कड़वा होता है इसको तो पीना ही होगा!

  6. Geeta kumari

    ओह, ये तो बहुत ही बुरी बात है।
    दुख होता है ऐसी व्यवस्था पर।

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      🙏🙏जी मैम

  7. Pragya Shukla

    चरमराई हुई व्यवस्था पर अच्छा तंज

  8. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    बहुत बहुत आभार 🙏

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