मैं सूरज को किसी दिन……………….

मोहब्बत करके पछताने की खुद को यूं सजा दूंगा
तुम्हें यादों में रक्खूंगा मगर दिल से भूला दूंगा।

रहो बेफ्रिक तूफानों तुम्हारा दम भी रखना है
किनारा आने से पहले मैं कश्ती को डूबा दूंगा।

ऐ लंबी और अकेली रातों इतना मत सताओ तुम
मैं सूरज को किसी दिन वक्त से पहले उगा दूंगा।

यूं ही घुट—घुट के रोने की मुझे आदत नहीं यारो
किसी दिन टूट कर बरसूंगा, सब आंसू बहा दूंगा।

कहानी कहने में भी हुनर की होेती जरुरत है
यूं अपना गम सुनाउंगा कि तुम सबको हंसा दूंगा।

जहर मत घोलना नफरत का, तुमको आग से मतलब
मुझे पहले बता देना,मैं अपना घर जला दूंगा।
…………………सतीश कसेरा

Comments

8 responses to “मैं सूरज को किसी दिन……………….”

  1. Abhishek Tripathi Avatar
    Abhishek Tripathi

    waahhhhh kya bat hai.. awsm… prfct.. (y)

    1. satish Kasera Avatar
      satish Kasera

      Thanks

  2. Priya rajput Avatar
    Priya rajput

    कहानी कहने में भी हुनर की होेती जरुरत है
    यूं अपना गम सुनाउंगा कि तुम सबको हंसा दूंगा।…nice

  3. satish Kasera Avatar
    satish Kasera

    Thanks Priya Ji

  4. राम नरेशपुरवाला

    वाह

  5. Abhishek

    मस्त

  6. Satish Pandey

    वाह जी

  7. वाह बहुत खूब

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