तै कहूँ जा
मोर आँखि के आघू म रैबे
भले तोला लागहि कोनो नई देखत हे
पर तय का जानिबे
मोर नजरे नजर म झूलत रथस
कभू मोर पीठ म छुरा झन घोपबे
प्रेम म कैबे त अपन जीव दे दह
अउ सीना जोरी करबे त
जी ले लह
काबर कि
तै मोर आँखि के आघू म हस
सबे दिन मोर नजर म हस
मोर नजर
Comments
4 responses to “मोर नजर”
-

👏👏
-
👌👌
-
Nice
-
क्षेत्रीय भाषा का सुंदर प्रयोग करते हुए रचना
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.