बुझती, बंद होती यादों की मोमबत्तियां,
दे जाती है याद आज भी मधुरिमा।
कुछ शब्द कोंधते हैं आवाज़ बनके
कहकहे हवाओंमें गूंजते हैं साज बनके।
निमिषा सिंघल
यादों की मोमबत्ती
Comments
12 responses to “यादों की मोमबत्ती”
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Good
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Thank you
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वाह
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🌺🌺
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Thank you
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Good
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Thank you
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Waah
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❤️❤️❤️❤️
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वाह बहुत सुंदर
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धन्यवाद
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🤔🤔
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