ये पूस का महिना कैसे हम भूला देंगे

ये पूस का महिना कैसे हम भूला देंगे?
सुना के कहानी बाल वीरों की सब को हम रुला देंगे।
रात अंधेरी थी घनघोर
नभ में बादल थे पुरजोड़।
निकल पड़े परिवार सहित
किला आनन्दपुर छोड़।।
जज्बा एक मलाल नहीं दुश्मन को मौत सुला देंगे।
ये पूस का महिना कैसे हम भूला देंगे।।
मुगल सैनिकों से बच बचकर
पहुँचे सरसा नदी किनारे।
परिवार बिछोरा हुआ यहीं पर
दुश्मन आ गए इनके आरे।।
आँखों में आंसू पी गए सोच दुश्मन को आज रुला देंगे।
ये पूस का महिना कैसे हम भूला देंगे।।
होने लगा युद्ध भयंकर
चमकौर की धरती पर।
भारी पड़ गए चालीस इनके
हजारों मुगल सैनिकों पर।।
विजित हुए पर दो बालक की बलिदानी कैसे भूला देंगे?
ये पूस का महिना कैसे हम भूला देंगे।।
बिछुड़ पिता बालक से
जंगल जंगल भटके।
दो बालक दादी संग
बावरची घर जा अटके।।
धोखा दिया बिधिना ने इसको हम कैसे भूला देंगे?
ये पूस का महिना कैसे हम भूला देंगे।।
कैद किया मुगलों ने आकर
शीतल बुर्ज में बन्द किया।
झुका न पाया लालच दहशत
धर्म का सिर बुलन्द किया।।
छोड़ दिया ये कहकर कल फाँसी पे झुला देंगे।
ये पूस का महिना कैसे हम भूला देंगे?
हुआ विहान बालक दोनों को
बीच दीवार चुनवाने लगा।
घटने लगी सांसों की गिनती
पर मन में न इस्लाम जगा।।
सरवंश दानी की शहादत को “विनयचंद “कैसे भूला देंगे?
ये पूस का महिना कैसे हम भूला देंगे?
,,,,,,,,,,,,,,,नमन शहीदों को,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

Comments

11 responses to “ये पूस का महिना कैसे हम भूला देंगे”

  1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    धन्यवाद

  2. Amod Kumar Ray Avatar
    Amod Kumar Ray

    मस्त।

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