ये सतरंगी इन्द्रधनुष
सात रंग से सज-संवर कर आया
अति सुन्दर सतरंगी इन्द्रधनुष
बरखा बरसे तब दिखता है,
अम्बर में यह इन्द्रधनुष
सप्तवर्ण यह इन्द्रधनुष
मोहित सी हो गई मैं,
उसकी छटा में खो गई मैं
यदा-कदा ही दिखता है,
नभ में यह इन्द्रधनुष
शोभा नभ की बढ़ जाती है,
जब जब दिखता है इन्द्रधनुष
मन-मोहित कर देता है,
यह सुन्दर सतरंगी इन्द्रधनुष
____✍️गीता
ये सतरंगी इन्द्रधनुष
Comments
6 responses to “ये सतरंगी इन्द्रधनुष”
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प्रकृति का जब कोई सुरम्य दृश्य सामने आता है, तो कवि की मन की वीणा के तार झंकृत होने लगते हैं, फलस्वरूप कवि के उदगार निकलने लगते हैं। प्रकृति की सुंदरता का अवलोकन करते हुए उसी पर कितनी कविताएं कवियों द्वारा कही जा चुकी हैं। यहाँ पर कवि गीता जी की निगाह प्रकृति के विलक्षण सौन्दर्य इंद्रधनुष की ओर गई जिसका चित्रण उन्होंने सफलता पूर्वक किया है। बहुत खूब।
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इतनी सुंदर समीक्षा के लिए आपका बहुत-बहुत आभार सर, प्रकृति के इस सुंदर दृश्य पर हृदय सच में बहुत प्रसन्न हो गया था और आपकी प्रेरक समीक्षा हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद
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बहुत खूब
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बहुत-बहुत धन्यवाद पीयूष जी
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शानदार कविता लिखी है आपने
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सादर धन्यवाद कमला जी
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