रिश्ता है बस निभाने का

बस अब और नहीं, गये अब दिन तुम्हारे हैं
हमने हंस हंस के, जो अपनाये अंगारे हैं
ये अंधेरे में सने पूनम की जो रातें हैं
दिये तुमने, पर यही अब संग हमारे हैं ।
गमों की कहाँ परवाह हमको है
खुशी की कहाँ चाह मन को है
मिले जो दर्द तुमसे है
बस उसीकी परवाह हमको है ।
थामा प्यार का दामन जो हमने था
बदला यह , बना कब दर्द का रिश्ता
समझ पाते, क्या है रिश्ते- नाते
पर समझने की धैर्य किसमें था।
खुद को सौंप के तुमको
निभाया फर्ज अर्धांगनी का
ख़बर थी कहाँ हमको
यह नाम का नाता, बस है निभाने को।

Comments

12 responses to “रिश्ता है बस निभाने का”

  1. अतिसुन्दर

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

  2. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    बहुत सुंदर

    1. Suman Kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद

  3. Geeta kumari

    Heart touching lines

    1. Suman Kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद

  4. सुन्दर रचना

    1. Suman Kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद

    1. Suman Kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद

  5. अतिसुंदर अभिव्यक्ति

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