रोटी

जब मिली रोटी किसी ने नखरा दिखाया
जब मिली रोटी किसी ने भूख को मिटाया
यह कैसी माया है तेरी भगवान्
जब मिली रोटी किसी को तु नज़र आया।

Comments

10 responses to “रोटी”

  1. वाह,क्या ख़ूब लिखा है

    1. शुक्रिया

    1. शुक्रिया

  2. Praduman Amit

    बात में बहुत दम है ।
    गौर से सोचो तो बम है ।।

    1. शुक्रिया

  3. बहुत ही काबिलेतारीफ

    1. शुक्रिया

  4. सुन्दर रचना
    काबिले तारीफ

    1. शुक्रिया

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