लगाव

दिल में लगा एक घाव हो गया
हर प्रश्न का जवाब हो गया
हमे पता ना चला
शायद हमे भी उनसे लगाव हो गया !

देर तक सोते थे
अब खुली आँखों का ख्वाब हो गया
उसके आने से ज़िन्दगी में
सब कुछ लाजवाब हो गया

मुझे समझने वाला वो
खुली किताब हो गया
ज़िन्दगी की दौड़ में जीता
वो खुशियों का ख़िताब हो गया

अभी मिले ही थे
नजाने कहा गायब हो गया
उसके ना मिलने पर
आँखों से आंसू निकले
तब हमे पता चला
हमे भी उनसे लगाव हो गया

Comments

6 responses to “लगाव”

  1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    सुन्दर भाव

  2. Priya Choudhary

    Nice

  3. Satish Pandey

    nice

  4. सुंदर रचना

  5. उम्दा रचना

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