ღღ__वो तो लालच है उनके ख्वाबों का, जो हमें सुला देता है “साहब”;
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वरना नींदें तो उनकी यादों ने, एक अरसे से उड़ा रक्खी हैं !!…….#अक्स
“लालच” #2Liner-19
Comments
11 responses to ““लालच” #2Liner-19”
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waaah
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shukriya bhai……….:)
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wah…very nice
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thanks a lott Anu ji…….
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Kya khub khaa aap ne…..
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shukriya bhai……:)
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नींद ना आयेगी अब, उनकी यादें आ गयी है
उनकी यादों और नींद में बनती नहीं..-

bht khoob
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120. ღღ___ये कहाँ की रीत है साहब, कोई जागे-कोई सोये;
रात सबकी है, तो नींद भी सबको आनी चाहिये !!‧•◦○●◯
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Nice
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अद्भुत लेखन
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