लिखते लिखते आज

लिखते लिखते आज कलम रूक गयी
इक ख्याल अटक सा गया था
दिल की दरारों में कहीं|

Comments

3 responses to “लिखते लिखते आज”

  1. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    बहुत ही उम्दा

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