चल रहे छोड़कर हम तो तेरा शहर दोस्तों।
लौटकर शीघ्र आऐंगे बाद- ए-कहर दोस्तों।।
साथ तेरा मिला हमें कदम -दर-कदम।
चीन से आके वाइरस ये बड़ा बेरहम।।
है ये कैसा मचाया जुल्म -ओ-कहर दोस्तों।
चल रहे छोड़कर हम तो तेरा शहर दोस्तों ।।
मेहनत से हमने भी तुझको अन धन का भंडार दिया।
तूने भी तो मुझको निज बच्चे -सा हीं प्यार दिया।।
बैठ के खाऊँगा आखिर कब तक इस कदर दोस्तों।
चल रहे छोड़कर हम तो तेरा शहर दोस्तों।।
लौटकर शीघ्र आऐंगे बाद -ए-कहर दोस्तों।।
लौटकर शीघ्र आऐंगे बाद-ए-कहर
Comments
23 responses to “लौटकर शीघ्र आऐंगे बाद-ए-कहर”
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👌
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🌹 -ए-शुक्रिया
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🙏
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बहुत खूब
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हार्दिक धन्यवाद
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बहुत अच्छा।
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धन्यवाद जी
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Nice poetry
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Thanks
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Too good …very nice poem Shashtri ji.
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Thank you for your comment
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A-1
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Thank u very much
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सुन्दर रचना
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धन्यवाद
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Wah Pandit ji bahut khoob
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धन्यवाद
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अच्छी रचना
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धन्यवाद
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वाह
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धन्यवाद
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धन्यवाद
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👍👏
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