लौटकर शीघ्र आऐंगे बाद-ए-कहर

चल रहे छोड़कर हम तो तेरा शहर दोस्तों।
लौटकर शीघ्र आऐंगे बाद- ए-कहर दोस्तों।।
साथ तेरा मिला हमें कदम -दर-कदम।
चीन से आके वाइरस ये बड़ा बेरहम।।
है ये कैसा मचाया जुल्म -ओ-कहर दोस्तों।
चल रहे छोड़कर हम तो तेरा शहर दोस्तों ।।
मेहनत से हमने भी तुझको अन धन का भंडार दिया।
तूने भी तो मुझको निज बच्चे -सा हीं प्यार दिया।।
बैठ के खाऊँगा आखिर कब तक इस कदर दोस्तों।
चल रहे छोड़कर हम तो तेरा शहर दोस्तों।।
लौटकर शीघ्र आऐंगे बाद -ए-कहर दोस्तों।।

Comments

23 responses to “लौटकर शीघ्र आऐंगे बाद-ए-कहर”

  1. Pragya Shukla

    👌

    1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

      🌹 -ए-शुक्रिया

    1. हार्दिक धन्यवाद

  2. Praduman Amit

    बहुत अच्छा।

  3. Kumar Mintu

    Too good …very nice poem Shashtri ji.

  4. Munna Mishra

    A-1

  5. Manoj Shastri Avatar

    सुन्दर रचना

    1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

      धन्यवाद

  6. Shiv Kumar

    Wah Pandit ji bahut khoob

    1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

      धन्यवाद

  7. Dhruv kumar

    अच्छी रचना

    1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

      धन्यवाद

    1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

      धन्यवाद

  8. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    धन्यवाद

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