वक्त के रंग

वक्त कब क्या रंग दिखाए हम नहीं जानते
वक्त के दिए हुए जख्म कैसे मिटाएं हम नहीं जानते
क्या पता था उस देवकी को,
जिस डोली में बिठाकर ,विदा कर रहे थे कंस
याकायाक उसे कारावास ना भेजतें
वक्त कब क्या रंग दिखाए हम नहीं जानते
क्या पता था उस राम को ,
जिसे रात में राज्य मिलने वाला था ,
उन्हे सुबह बनवास ना भेजतें
वक्त कब क्या रंग दिखाए हम नहीं जानते
क्यों रौब झाड़ते फिर रहे अपनी कमाई दौलत शोहरत पर
कुछ अपनी ऐसी छवि बनाए ,
ताकि लोग भी मजबूर हो जाए
आंसू बहाने के लिए हमारी भी मय्यत पर
सुना है मैंने , अच्छे लोगों को लोग नहीं भूलते

Comments

12 responses to “वक्त के रंग”

    1. धन्यवाद

  1. Praduman Amit

    कविता में दम है। सच्चाई पुरी तरह व्यक्त करती है।

    1. आपका सादर अभिनन्दन

  2. G Braw

    आगे भी ऐसे ही कविताएं लिखते रहें

    1. Ekta Gupta

      उत्साहवर्धक समीक्षा के हेतु धन्यवाद

  3. अतिसुंदर रचना

  4. Komal sonwani

    very niche👌🏻👌🏻

  5. Komal sonwani

    very nice👌🏻👌🏻

  6. vikash kumar

    कुछ अपनी ऐसी छवि बनाए ,
    ताकि लोग भी मजबूर हो जाए
    आंसू बहाने के लिए हमारी भी मय्यत पर
    सुना है मैंने , अच्छे लोगों को लोग नहीं भूलते

  7. बहुत सुंदर 

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