वो ऐसा सोंच भी कैसे सकते हैं
मेरे देश के ही दुधमुहे बच्चे हैं
पर करें भी तो हम क्या करें
वह दहशत गर्दों के सम्पर्क में रहते हैं
पथ्थर फेंकते हैं सेना के ऊपर
और जेहाद कहते हैं
करें भी तो क्या करें
वह तो जेब के साथ दिल में भी बम रखते हैं
जो सस्ते हैं उनके जीवन से
जाने किस पाठशाला में पढ़ते हैं
हमारे कश्मीर के नागरिक तो
पाकिस्तान के इशारों पर चलते हैं
वह दहशत गर्दों के सम्पर्क में
Comments
6 responses to “वह दहशत गर्दों के सम्पर्क में”
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जेहादी मुद्दे पर संजीदा रचना
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जी बिल्कुल सही कहा आपने धन्यवाद
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बहुत सुन्दर👌👌
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Thanks
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अतिसुंदर
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धन्यवाद
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