विनम्रता की पराकाष्ठा

मां और पत्नी दोनों गुरू,
दोनों से नव-जीवन शुरू।
मां कहे , पत्नी सिखाती,
पत्नी कहे, मां सिखाती ।
विनम्रता की पराकाष्ठा देखो,
सिखाने का श्रेय एक-दूजे को दिलाती
✍️…गीता

Comments

28 responses to “विनम्रता की पराकाष्ठा”

  1. हा हा हा…
    अच्छा व्यंग है

    1. बहुत बहुत धन्यवाद आपका भाई जी 🙏

  2. Pratima chaudhary

    बहुत सुंदर पंक्तियां, हास्य व्यंग

    1. Geeta kumari

      धन्यवाद जी

  3. मोहन सिंह मानुष Avatar

    और साहस की बात यह भी है कि उन दोनों के सीखाएं गए ज्ञान को पचाना बड़ा मुश्किल हो जाता है बेटे को।
    बहुत ही निष्पक्षता की आवश्यकता होती है इस ज्ञान के लिए 😊😊😁
    बहुत ही बेहतरीन हास्य व्यंग कविता

    1. Geeta kumari

      बिल्कुल ऐसा ही होता होगा।
      समीक्षा के लिए बहुत बहुत धन्यवाद 🙏

  4. इस तरह की आदर्श स्थिति प्रस्तुत करने हेतु आपकी लेखनी की जितनी तारीफ की जाये वह कम है। जहां ऐसा है वहां वास्तव में स्नेह-प्रेम की व्यापकता रहती है।
    बहुत खूब

    1. Geeta kumari

      इतनी सटीक समीक्षा के लिए बहुत बहुत धन्यवाद आपका सतीश जी 🙏🙏….आप मेरे लेखन में सच में बहुत उत्साह वर्धन करते हैं।
      बहुत बहुत आभार

  5. बहुत शानदार लेखन

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत शुक्रिया जी 🙏

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत शुक्रिया चंद्रा जी🙏

  6. Very nice गीता मैम

    1. Geeta kumari

      Thank you very much for your pricious comment 🙏

    1. Geeta kumari

      Thank you very very much Isha ji💐

    1. Geeta kumari

      Thank you very much 🙏

  7. आप ने सच ही कहा है बहुत अच्छी लेखनी

    1. Geeta kumari

      धन्यवाद जी 🙏

  8. Praduman Amit

    बहुत ही सुंदर प्रस्तुति ।

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद जी 🙏

  9. Indu Pandey

    Atisundar Geeta ji

    1. Geeta kumari

      Thanks Allot Indu ji 🙏

  10. Seema Chaudhary

    हा हा हा बहुत ख़ूब बिल्कुल सही

    1. Geeta kumari

      शुक्रिया

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