7 Comments

  1. बिलकुल सही कहा आपने ।
    पहले जो घर की देवी है उसका सम्मान करें । चाहे वो माँ , पत्नी, बहन बेटी या सहकर्मी हो।

  2. कवि सतीश जी ने अपनी इस रचना के माध्यम से यह समझाने की सफल कोशिश की है कि हमें अपने बड़ों, बुजुर्गों का सम्मान करना चाहिए , ना कि उनकी सेवा करने की उम्र में उन्हें वृद्धाश्रम जैसी जगह पर छोड़कर अपने फ़र्ज़ से मुंह मोड़ लिया जाए । बहुत सुंदर संदेश और बहुत ही सुन्दर कविता..

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