वृद्धाश्रम

ओ माँ कितनो को तुझ पर
कविताएं पढ़ते देखा है
तेरी तारीफों में कितने कसीदे गढ़ते देखा है,
कितनो को शब्दोँ से सिर्फ तुझपर प्यार लुटाते देखा है,
कितना इस दुनिया को तेरी ममता का पाठ सुनाते देखा है,
देखा है पर कुछ ऐसा भी जिसके लिए मिलते शब्द नहीं,
मायूसी सी छा जाती है दिल में जग जाते दर्द कहीं,
तू जिसके लिए सब कुछ थी कल तो,
क्यों फिर अब तेरा कोई वजूद नहीं,
कितनी कद्र है तेरी, तेरा ही भविष्य तुझे बताता है,
कैसे एक एक करके सारे हिसाब गिनाता है,
मुड़ कर क्यों नहीं देख पाता वो,
तेरे चेहरे पर छुपी वो मायूसी,
तेरी मुस्कराहट में पीछे भी कितनी है बेबसी,
क्यों याद नहीं कुछ उसको कैसे तू रात भर न सोती थी,
कैसी भी उलझन हो तुझको,तू कभी नहीं रोती थी,
क्या दर्द सहकर तूने उसकेअस्तित्व को सँवारा है,
क्यों आँखों में तू चुभती है जब वो तेरी आँखों का तारा है ,
जिस घर को तूने तिनकों से जोड़ा!
और सुन्दर महल बनाया था,
क्यों आज उसी घर में तेरा होना खटकते देखा है,
जिन हाथों से तूने दिन भर उसकी भूख को मिटाया था,
उन काँपते हाथों को भी मैंने उसको झटकते देखा है,
कितना दर्द तेरी इन बिलखती आँखों में उठते देखा है,
ढलती हुई उम्र की इन कोमल सलवटों को उभरते देखा है,
ओ माँ तेरे हालातों से मैंने पर्दा उठते देखा है ,
तेरी मज़बूर निग़ाहों में तेरी आस को मरते देखा है
ओ माँ कितनो को तुझ पर कविताएं पढ़ते देखा है ,
तेरी तारीफों में कितने कसीदे गढ़ते देखा है!
©अनीता शर्मा
अभिव्यक्ति बस दिल से

Comments

9 responses to “वृद्धाश्रम”

    1. Anita Sharma

      Shukriya

  1. Satish Pandey

    अनीता जी की यह कविता पारिवारिक जीवन के सच को उजागर कर रही है, भाव पक्ष इतना सुदृढ़ है कि तिनका तिनका जोड़कर परिवार को बनाने वाली माँ एक दिन हाशिये पर चली जाती है, वृद्ध माँ के वजूद पर जो प्रहार किया जा रहा है उसे प्रभावी तरीके से उजागर किया गया है, धन्यवाद

  2. Anita Sharma

    जी बहुत शुक्रिया
    सही में माँ तो पूरे कुनबे को सँभाल लेती है परन्तु एक माँ को सँभालने में कितना विचार करते हैं आज के बच्चे

    1. Satish Pandey

      सच्ची बात

  3. वाह अनीता जी। आप में उत्तम रचना लिखने का हुनर है।
    परंतु कुछ त्रुटि हैं।
    कितनों
    शब्दों
    तुझ पर।
    बाकी सब कुछ बेहतरीन है।
    ये बड़े शर्म की बात है की
    माँ की ममता को जलील करने वाले लोगों को अपनी गलती का अहसास तक नहीं होता

    1. Anita Sharma

      जी कोशिश जारी है,त्रुटियों में सुधार भी हो रहा है
      यहाँ सभी लोग बहुत अच्छे हैं लेखन में
      बहुत कुछ सीखने को मिल रहा है
      आप सभी का मार्गदर्शन मिलता रहे
      शुक्रिया सर

      1. वेलकम

Leave a Reply

New Report

Close