9 Comments

  1. अनीता जी की यह कविता पारिवारिक जीवन के सच को उजागर कर रही है, भाव पक्ष इतना सुदृढ़ है कि तिनका तिनका जोड़कर परिवार को बनाने वाली माँ एक दिन हाशिये पर चली जाती है, वृद्ध माँ के वजूद पर जो प्रहार किया जा रहा है उसे प्रभावी तरीके से उजागर किया गया है, धन्यवाद

  2. जी बहुत शुक्रिया
    सही में माँ तो पूरे कुनबे को सँभाल लेती है परन्तु एक माँ को सँभालने में कितना विचार करते हैं आज के बच्चे

  3. वाह अनीता जी। आप में उत्तम रचना लिखने का हुनर है।
    परंतु कुछ त्रुटि हैं।
    कितनों
    शब्दों
    तुझ पर।
    बाकी सब कुछ बेहतरीन है।
    ये बड़े शर्म की बात है की
    माँ की ममता को जलील करने वाले लोगों को अपनी गलती का अहसास तक नहीं होता

    1. जी कोशिश जारी है,त्रुटियों में सुधार भी हो रहा है
      यहाँ सभी लोग बहुत अच्छे हैं लेखन में
      बहुत कुछ सीखने को मिल रहा है
      आप सभी का मार्गदर्शन मिलता रहे
      शुक्रिया सर

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