25 Comments

  1. वाह क्या बात है गीता जी। आपने मां का यथार्थ स्वरूप प्रस्तुत करने में पूर्ण सफलता प्राप्त की है। वास्तव में मां होती ही ऐसी है। आपकी इस लेखन क्षमता को सादर अभिवादन। खूब लिखते हैं वाह

  2. आपकी टिप्पणी और प्रशंसा का हार्दिक आभार सतीश जी ।
    कवि को सुंदर और प्रेरक समीक्षा मिलती रहें तो लेखन में उत्साह वर्धक होता है । बहुत बहुत धन्यवाद सर 🙏

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