व्यथित मन

घबरा जाती हूं, विवादों से,
व्यथित हो उठता है मन,।
शांत हो पाती हूं एकान्त से,
करती हूं दूर ऐसे टेंशन ।

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Responses

  1. बहुत ही लाजबाब, कितना सुंदर भाव है। उलझनों से दूर जाकर एकांत में मन शांत कर लेने का भाव बहुत ही कोमल है। खूबसूरत पंक्तियाँ

    1. हांजी सर ,करना पड़ता है कभी कभी ऐसे भी।
      सुन्दर समीक्षा और भाव को समझने हेतु बहुत बहुत आभार।🙏

  2. Hahaha ,। ऋषि जी बाम की भी मदद लेनी पड़ जाती है।
    …….करती नहीं फिर कुछ भी काम,
    सो जाती हूं लगा के बाम।
    सुन्दर समीक्षा के लिए बहुत बहुत धन्यवाद 🙏

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