13 Comments

  1. अच्छा अब हॅंस दो ना थोड़ा
    ये बन्धन ईश्वर ने जोड़ा।
    याद हमें भी रखना बस तुम,
    भूल ना जाना सखी प्यारी
    साजन के द्वारे अब जा री॥
    —- बहुत सुंदर और भावुक कर देने वाली कविता की सृष्टि हुई है। लेखनी को सैल्यूट

    1. कविता की इतनी उत्कृष्ट और उत्साहवर्धन करती हुई समीक्षा हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी, अभिवादन सर

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