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सच्ची दोस्ती सच्चा प्यार(भाग-१)

By Praduman Amit Posted on May 15, 2020October 23, 2020 Category :
  • लघुकथा

अनिता नाम था। देखने में साँवली सलोनी। उसकी आँखें किसी गहड़ी झील से कम नहीं था। उसकी मुस्कान व अदा का क्या नाम दें, मेरे पास शब्द ही नहीं है। कुदरत ने केवल उससे गोरा रंग ही चुराया था। चंचल स्वभाव के कारण ही अमित उसे कब कहाँ क्यों और कैसे दिल दे दिया पता तक नहीं चला। वह हमेशा अमित के संग हंसी मजाक, लड़ाई झगडा कर लिया करती थी। कभी कभी एक दूसरे को देखना तक पसंद नहीं करते थे। दो तीन दिन बाद फिर एक दूसरे को देख कर मुस्करा दिया करते थे। अनिता में बचपना कूट कूट के भरी हुई थी। कयी मर्तबा अपनी नजरों के किताब भी उसके सामने खोला मगर, वह पढने में नाकामयाब रही। अल्हड़पन में ही उसकी जवानी दो दगा़ बाजों के बीच फंसा हुआ था। वक्त यों ही गुज़रता गया। एक दिन अनिता कॉलेज से घर आ रही थी। अमित अनिता को रोकते हुए कहा -“अनिता ।ंमै तुम से कुछ कहना चाहता हूँ “।अनिता अपनी नजर दूसरे तरफ फेंकती हुयी –“बोलो”।अमित –“मैं…. मैं…… “।अनिता –“ए मैं मैं क्या लगा रखे हो। जल्दी बोलो मेरे पास समय नही है”।अमित -“मैं तुम्हें अपने दिल से चाहता हूँ। क्या मेरे लिए तुम्हारे दिल में कोई जगह है”?अनिता –“व्हाट नोनसेंस। कहीं तुम्हारा दिमाग खराब तो नहीं हो गया। प्यार मुहब्बत अपने से बराबर वालों के साथ होता है। तूम कहाँ और मैं कहाँ। अपने दिल से मेरा सपना देखना छोड़ दो। जीवन में कुछ कर लो अमित यदि यह समय गुजर गया तो हाथ मलते रह जाओगे। प्यार मुहब्बत ही हर इनसान का लक्ष्य नहीं होता है”। इतना सुनते ही अमित को गहड़ा झटका लगा। उसका दिमाग सुन्न हो गया। उस दिन से अमित अनिता से दूर रहने लगा। अमित अपनी जख़्म दिखाए तो किसको दिखाए। कुछ दिन गुजरने के बाद, एक दिन शाम के समय अमित अनिता को किसी गैर के साथ देखा। शायद वह गैर उसका अपना था। तभी तो दोनों एक दूसरे के हाथो हाथ रखे जीने मरने की कसमे खा रहे थे। आधा घंटा गुजरने के बाद वह अपनी बाइक से वहाँ से चल पड़ा। उसका चेहरा मैं देख नहीं पाया। क्योंकि वह अपनी पीठ मेरी ओर घूमा कर बाते करने में मगन था। अनिता जैसे ही अपने घर की ओर चलने लगी वैसे ही अमित उसे पुकारा –“जरा ठहरो “।अनिता –“तूम मेरे पीछे क्यों पड़े हो। मै तुमसे प्यार व्यार नहीं करती”।वह और आंसू के झील में डूब कर रह गया। अंत में उसने अपनी प्रेम कहानी अपने जिगरी दोस्त सुरेश को सुनाया। सुरेश –“तू कहीं पागल तो नहीं हो गया है। अगर वह तुम से प्यार नहीं करती है तो तुम्हें जबरदस्ती भी करने का कोई हक नहीं…….. (शेष अगले पेज में इस कहानी के अंत करेंगे। धन्यवाद)

दोस्ती पर कविता
Praduman
Praduman Amit

8 Comments

  1. Pragya Pragya says:
    May 15, 2020 at 3:14 pm

    Good

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  2. महेश गुप्ता जौनपुरी says:
    May 15, 2020 at 3:25 pm

    वाह बहुत सुंदर

    Log in to Reply
  3. Abhishek Abhishek kumar says:
    May 15, 2020 at 3:38 pm

    अति भावपूर्ण कहानी

    Log in to Reply
  4. Pragya Pragya says:
    May 15, 2020 at 4:07 pm

    अगला भाग कब??

    Log in to Reply
  5. महेश गुप्ता जौनपुरी says:
    May 15, 2020 at 4:08 pm

    वाह

    Log in to Reply
  6. Pt, vinay shastri 'vinaychand' Pt, vinay shastri 'vinaychand' says:
    May 15, 2020 at 8:36 pm

    Nice

    Log in to Reply
  7. Dhruv Dhruv kumar says:
    May 16, 2020 at 4:25 pm

    Nyc

    Log in to Reply
  8. Satish Chandra Pandey Satish Chandra Pandey says:
    July 31, 2020 at 1:11 pm

    Nice

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