सच सदा से कड़वा होता है

सच बोलने को हिम्मत चाहिए
मीठा झूठ सभी को भाता है
सच सदा से कड़वा होता है
मधुमेह वालों को भी न सुहाता है
तब रावण एक अकेला था
हर घर अब रावण का मेला है
पागल खाने में भी जगह कहां
जहां मुफ्त में भोजन मिलता है
मुश्किल में हंसने वालों के लिए
इक जगह वहीं बस दिखता है
सुख मिलने पर भी लोग हंसते कहां
याद दिलाते तो कष्ट से हो पाता है
मुस्कुराने में जो भी मेहनत लगती
चेहरे पर स्पष्ट नजर आ जाता है

Comments

2 responses to “सच सदा से कड़वा होता है”

  1. Geeta kumari

    अति सुन्दर भाव एवम् प्रस्तुति । “सच सदा से कड़वा होता है ” में अनुप्रास अलंकार की सहज प्रस्तुति कविता को सुंदर बना रही है ।

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