समरसता

जाति धर्म के भेद को, आओ जाए भूल
डिठौना एक मां भारती, ललाट भारत धूल
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दुनिया भारत देश से, समरसता का सार
सीख सीख पहुंचा रही, इंसानो के द्वार

Comments

2 responses to “समरसता”

  1. वाह बहुत खूब

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