समाज

समाज में धोखेबाजों का लगा अंबार है,
असमाजिक तत्वों से भरा संसार है।
उग्रता में बह रहा देश का अहंकार,
चरित्र के आन बान पर टिका यह संसार है।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

Comments

7 responses to “समाज”

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  2. Praduman Amit

    बहुत सुन्दर।

  3. त्रुटियाँ हैं पर भाव अच्छे हैं

  4. आपकी सोच बहुत अच्छी है

  5. सुंदर पंक्तियां

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