धर्म बचाने के खातिर अपना सर्वस्व बलिदान दिया।
हुए पिता कुर्बान थे उनके पुत्रों ने भी बलिदान दिया।।
कटा दिए सिर एक एक कर पर चोटी नहीं कटाई।
अनशन कर प्राण दिया पर जूठी रोटी नहीं खाई।।
ऐसे सरवंश दानी को दिल से सब प्रणाम करो।
“विनयचंद “निज देश धर्म का सदा सहृदय सम्मान करो।।
,,,,,,,,,,,,,,,,शहीदों को कोटिशःप्रणाम,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
सरवंश दानी को प्रणाम
Comments
13 responses to “सरवंश दानी को प्रणाम”
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Nice
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धन्यवाद
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धन्यवाद
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वाह क्या बात है
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धन्यवाद जी
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Good
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धन्यवाद
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वेलकम
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सुन्दर
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धन्यवाद
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Nice
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Nice Pandit ji
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